सीमांकन असली मुद्दा, महिला आरक्षण नहीं: सोनिया गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर परिसीमन को असली मुद्दा बताते हुए हमला किया। उन्होंने महिला आरक्षण में देरी और जाति जनगणना को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन (डीलिमिटेशन) है। उन्होंने कहा कि लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन को राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होना चाहिए।
सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को आगे बढ़ा रही है, जबकि असली मुद्दा परिसीमन है, जिसे उन्होंने संविधान पर “हमला” और “बेहद खतरनाक” बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जाति जनगणना को टालने की कोशिश कर रही है। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि सरकार चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बीच महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए विशेष सत्र बुलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
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उन्होंने कहा कि “इस जल्दबाजी का एक ही कारण है—राजनीतिक लाभ उठाना और विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में डालना।”
सोनिया गांधी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसमें लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान है। यह प्रावधान जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू होना था।
उन्होंने सवाल उठाया कि अब सरकार इसमें संशोधन कर 2029 से इसे लागू करने की बात कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि 30 महीने तक देरी क्यों की गई और अब अचानक बदलाव क्यों किया जा रहा है।
सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना को लेकर भ्रम फैला रही है, जबकि यह देरी जानबूझकर की जा रही है।
यह बयान 16 से 18 अप्रैल तक होने वाले विशेष संसद सत्र से पहले आया है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर चर्चा होनी है।
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