पुतिन-पीएम मोदी की शुक्रवार को मुलाकात में छाएगा एसयू-57 लड़ाकू विमान सौदा, ब्रिक्स सम्मेलन से पहले होगी द्विपक्षीय वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को नई दिल्ली में मिलेंगे। बातचीत में एसयू-57 लड़ाकू विमान सौदा, व्यापार और आर्थिक सहयोग प्रमुख मुद्दे रहने की संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार, 11 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस दौरान रूस के एसयू-57 लड़ाकू विमानों की भारत को संभावित बिक्री प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकती है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मॉस्को से वर्चुअल ब्रीफिंग के दौरान बैठक की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों नेता द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा शुरू करेंगे।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन की मेजबानी करेंगे, जबकि राष्ट्रपति पुतिन ने इसमें शामिल होने की पुष्टि की है।
और पढ़ें: पीएम मोदी-पेजेश्कियन मुलाकात के बाद ईरान ने भारत से रिश्तों को बताया ऐतिहासिक, व्यापार बढ़ाने पर जोर
एसयू-57 सौदा और व्यापार पर होगी चर्चा
पेस्कोव ने कहा कि रूस के एसयू-57 लड़ाकू विमानों की भारत को संभावित बिक्री दोनों नेताओं की बातचीत में प्रमुख मुद्दा हो सकती है। इसके अलावा व्यापार और आर्थिक सहयोग भी चर्चा के एजेंडे में शामिल रहने की संभावना है। हालांकि, भारत सरकार ने पेस्कोव की टिप्पणियों पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पेस्कोव ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की योजना की भी आलोचना की और इसे अवैध तथा अस्वीकार्य बताया।
ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य देशों, साझेदार देशों और आमंत्रित प्रतिनिधियों के नेता शामिल होंगे। 11 सदस्यीय समूह में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की हालिया मुलाकात किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान हुई थी। यह पिछले दिसंबर में नई दिल्ली में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद उनकी पहली आमने-सामने की बैठक थी। उस दौरान मोदी ने लंबे संघर्ष से दूर होकर शांति की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया था।