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लोकसभा में सीट व्यवस्था को लेकर सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष ने ओम बिरला से की मुलाकात

तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए सांसदों की सीट व्यवस्था और पार्टी मान्यता को लेकर सुदीप बंदोपाध्याय व काकोली घोष ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की।

लोकसभा सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। दोनों नेता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक में लोकसभा में एनसीपीआई के 20 सांसदों के लिए सीट व्यवस्था और अन्य संसदीय सुविधाओं को लेकर चर्चा हुई।

यह मुलाकात संसद के मानसून सत्र से पहले हुई है। साथ ही यह बैठक उस समय हुई है, जब भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी के रूप में एनसीपीआई को संसदीय मान्यता देने की प्रक्रिया चल रही है।

सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान नए संसद भवन में पार्टी कार्यालय आवंटित करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सुदीप बंदोपाध्याय ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। पार्टी जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को औपचारिक पत्र सौंप सकती है, जिसमें एनसीपीआई को संसदीय मान्यता देने की मांग की जाएगी।

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टीएमसी ने 20 सांसदों की अयोग्यता की मांग की

सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष की लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की है।

लोकसभा में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला से मुलाकात कर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का कहना है कि इन सांसदों ने दूसरी पार्टी में शामिल होकर स्वेच्छा से टीएमसी की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए वे अयोग्यता के दायरे में आते हैं।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, सोमवार को हुई लोकसभा अध्यक्ष के साथ बैठक में सांसदों की अयोग्यता से जुड़ा मुद्दा नहीं उठाया गया।

काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की

इस बीच एनसीपीआई सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी को सदन से निष्कासित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने सदन परिसर में बार-बार अभद्र भाषा, महिला विरोधी टिप्पणियां और अनुचित व्यवहार किया।

काकोली घोष ने कहा कि यह व्यवहार किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि लगातार जारी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने व्यक्तिगत हमले और डराने-धमकाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया।

उन्होंने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 105 का उल्लेख करते हुए कहा कि सांसदों को मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उद्देश्य संसदीय कार्यों में निर्भीक भागीदारी सुनिश्चित करना है, न कि व्यक्तिगत अपमान की अनुमति देना।

वहीं कल्याण बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरोप झूठे, मनगढ़ंत और बाद में लगाए गए हैं।

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