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सुनील तटकरे की प्रदेशाध्यक्ष पद पर नियुक्ति पर सवाल, चुनाव आयोग में शिकायत से एनसीपी में बढ़ा विवाद

एनसीपी अजित पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे की नियुक्ति पर पार्टी नेता ने सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग में शिकायत कर संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया नहीं अपनाने का आरोप लगाया गया है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजित पवार गुट में प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे की नियुक्ति को लेकर अंदरूनी विवाद बढ़ गया है। पार्टी के ही एक नेता ने तटकरे के चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव में पार्टी के संविधान में निर्धारित संगठनात्मक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, सुनील तटकरे का तीन साल का सामान्य कार्यकाल जुलाई 2026 में समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद पार्टी ने निर्धारित संगठनात्मक चुनाव नहीं कराया और तटकरे अब भी प्रदेशाध्यक्ष पद पर बने हुए हैं।

शिकायत में कहा गया है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संविधान के मुताबिक प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव से पहले तालुका अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष और विभागीय अध्यक्षों का चुनाव कराया जाता है। इसके बाद संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत प्रदेशाध्यक्ष का चयन किया जाता है। आरोप है कि इन प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना ही तटकरे को दोबारा प्रदेशाध्यक्ष चुन लिया गया।

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जालना जिले के परतूर विधानसभा क्षेत्र से एनसीपी अजित पवार गुट के नेता भाऊसाहेब दत्ताराव पाटिल गोरे ने भी तटकरे के चयन को कथित तौर पर गैरकानूनी बताया है। उनका कहना है कि तटकरे का कार्यकाल जुलाई में समाप्त होना था, लेकिन इससे करीब छह महीने पहले फरवरी में ही उन्हें दोबारा प्रदेशाध्यक्ष चुन लिया गया।

गोरे के मुताबिक, जिस चुनाव प्रक्रिया के तहत तटकरे को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया, उसमें चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया था। न तो नामांकन दाखिल करने की तारीख तय की गई, न नामांकन वापस लेने की समयसीमा घोषित हुई और न मतदान की तारीख तय की गई। इसके अलावा चुनाव अधिकारी की नियुक्ति और परिणाम घोषित करने की निर्धारित प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई।

उन्होंने दावा किया कि पार्टी के विशेष अधिवेशन में ही तटकरे को प्रदेशाध्यक्ष चुन लिया गया, जबकि संगठनात्मक चुनाव के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं की गई थीं।

अब इस शिकायत पर केंद्रीय चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार है। आयोग अगर शिकायत पर संज्ञान लेकर प्रक्रिया की जांच करता है, तो इसका सीधा असर तटकरे के प्रदेशाध्यक्ष पद पर पड़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आयोग इस मामले में क्या निर्णय लेगा।

आयोग के फैसले के बाद ही तय होगा कि सुनील तटकरे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष पद पर बने रहेंगे या उनकी नियुक्ति पर कोई नई कार्रवाई होगी।

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