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बड़ी कंपनियों को पर्यावरणीय नुकसान की अधिक जिम्मेदारी उठानी होगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बड़ी कंपनियों को अपने बड़े पैमाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की अधिक जिम्मेदारी उठानी होगी और एनजीटी द्वारा लगाए गए ₹5 करोड़ के मुआवजे को सही ठहराया।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि यदि कोई कंपनी अपने बड़े पैमाने के संचालन से अधिक मुनाफा कमाती है, तो उसे पर्यावरणीय नुकसान की अधिक जिम्मेदारी भी उठानी होगी। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के उस आदेश को बरकरार रखते हुए की, जिसमें हरित मानदंडों का उल्लंघन करने पर एक बिल्डर पर ₹5 करोड़ का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया था।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में किसी कंपनी के संचालन के पैमाने—जैसे टर्नओवर, उत्पादन क्षमता या राजस्व—को पर्यावरणीय नुकसान से जोड़ना मुआवजा तय करने का एक मजबूत आधार हो सकता है।

अदालत ने कहा कि बड़े स्तर पर संचालन का अर्थ है पर्यावरण पर बड़ा प्रभाव। इसका मतलब अधिक संसाधनों का उपयोग, ज्यादा उत्सर्जन और अधिक अपशिष्ट, जिससे पर्यावरणीय दबाव बढ़ता है। पीठ ने कहा, “यदि कोई कंपनी अपने बड़े पैमाने के कारण अधिक लाभ कमाती है, तो यह तर्कसंगत है कि उसे पर्यावरणीय लागत की अधिक जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। संचालन के पैमाने को प्रभाव से जोड़ना यह संदेश देता है कि बड़ी कंपनियों को अधिक हरित नियमों का पालन करना होगा।”

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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कंपनी का अधिक टर्नओवर उसके संचालन के व्यापक स्तर को दर्शाता है। यदि ऐसी कंपनी पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाती है, तो उसका टर्नओवर और हुए नुकसान के बीच सीधा संबंध हो सकता है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि मुआवजा तय करते समय टर्नओवर को कभी भी प्रासंगिक कारक नहीं माना जा सकता।

इस मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने वर्ष 2022 में पुणे के औताडे हांडेवाड़ी क्षेत्र में स्थित रिदम काउंटी परियोजना को पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन का दोषी ठहराया था। एनजीटी ने पाया कि बिल्डर ने पर्यावरणीय स्वीकृति लिए बिना निर्माण कार्य किया और वायु एवं जल अधिनियम के तहत अनिवार्य अनुमति भी नहीं ली। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया, जबकि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने काम रोकने का निर्देश दिया था।

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