शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर सिर्फ आंदोलन के कारण लाठीचार्ज नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी प्रदर्शन पर पुलिस लाठीचार्ज मामले में सुनवाई मंजूर की। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है और सिर्फ आंदोलन के कारण बल प्रयोग नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज के मामले में सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार कर ली है। यह मामला राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष सोमवार को याचिकाओं के एक समूह का उल्लेख किया गया, जिसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई मंगलवार के लिए तय कर दी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण और कानूनी प्रदर्शन के अधिकार की पूरी तरह गारंटी देता है।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक कोई आंदोलन शांतिपूर्ण है, केवल इस आधार पर कि प्रदर्शन हो रहा है, लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई अतिरिक्त बल प्रयोग या ज्यादती हुई है, तो उसकी स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह चिंता केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। अदालत ने कहा कि देशभर में प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के लिए एक समान प्रक्रिया और प्रोटोकॉल होना जरूरी है। न्यायालय ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अनुशासन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की प्रक्रिया में नियमों का पालन आवश्यक है।
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च का भी आह्वान किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की थी, जिसमें लाठीचार्ज और अन्य उपायों के इस्तेमाल के आरोप लगे थे।
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद भी पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद जारी रहा। विपक्षी नेताओं ने सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए थे। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के तरीके और नियमों के पालन की समीक्षा किस तरह की जाती है।