सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई के अधिकारों पर उठाए सवाल, क्या कानून कॉलेजों को नियंत्रित कर सकता है बार काउंसिल?
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई के कानून कॉलेजों पर नियामक अधिकारों की सीमा पर सवाल उठाए हैं। अदालत जांच रही है कि शिक्षा नियंत्रण का वैधानिक अधिकार वास्तव में कितना व्यापक है।
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के उस वैधानिक अधिकार की सीमा पर सवाल उठाया है, जिसके तहत वह कानून कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कानूनी शिक्षा को नियंत्रित करने का दावा करती है। अदालत यह जांच रही है कि कानूनी पेशे और अधिवक्ताओं को नियंत्रित करने वाली संस्था को कानून संस्थानों पर भी प्रत्यक्ष नियामक अधिकार हासिल है या नहीं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ बुधवार को बीसीआई-पीईएआरएल फर्स्ट ट्रस्ट और उससे जुड़े कानून संस्थानों के मामलों की सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि क्या बीसीआई को कानूनी शिक्षा के नियमन के लिए विशेषज्ञ संस्था माना जा सकता है। पीठ ने संकेत दिया कि कानूनी शिक्षा से जुड़े अकादमिक मामलों को कानून के विद्वानों और शिक्षाविदों जैसे विशेषज्ञ बेहतर ढंग से देख सकते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बीसीआई कानून की पढ़ाई की अवधि जैसे सामान्य मानक तय कर सकती है, लेकिन इससे उसे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर व्यापक नियंत्रण का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता।
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बीसीआई की भूमिका पर क्या है विवाद?
मामले में मुख्य सवाल बीसीआई को दिए गए वैधानिक अधिकारों की सीमा से जुड़ा है। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि अधिवक्ता के रूप में नामांकन से पहले कानून छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का वैधानिक अधिकार बीसीआई के पास नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षण संस्थान और उनके नियम लागू होते हैं।
प्रशांत भूषण ने उठाया हितों के टकराव का मुद्दा
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बीसीआई के नियामक और संस्थागत भूमिकाओं के संभावित टकराव का मुद्दा उठाया। उन्होंने बीसीआई-पीईएआरएल फर्स्ट ट्रस्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रस्ट ने गोवा और आंध्र प्रदेश में कानून संस्थान स्थापित किए हैं।
इस मामले में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या कोई संस्था एक साथ नियामक और शिक्षण संस्थानों से जुड़ी भूमिका निभा सकती है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी बीसीआई पदाधिकारियों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद ट्रस्ट में स्थायी ट्रस्टी बने रहने से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठा चुका है।
कानूनी शिक्षा पर क्या होगा असर?
मामले के फैसले से बीसीआई, कानून विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक नियामकों के बीच जिम्मेदारियों की सीमा स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल अदालत यह जांच रही है कि बीसीआई के अधिकार केवल शैक्षणिक मानक तय करने तक सीमित हैं या वे कानून कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रत्यक्ष नियमन तक भी जाते हैं।
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