नेताजी की अस्थियां भारत लाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फाफ की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिका में जापान से अस्थियां भारत लाने की मांग है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फाफ की उस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जिसमें जापान के टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की कथित अस्थियों को भारत लाने की मांग की गई है। ये अस्थियां पिछले आठ दशक से अधिक समय से मंदिर में संरक्षित होने की बात कही जाती है।
अनीता बोस फाफ लंबे समय से यह मानती रही हैं कि रेंकोजी मंदिर में रखी अस्थियां उनके पिता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन्हें भारत लाने और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
नेताजी के निधन को लेकर दशकों से रहस्य और विवाद बना हुआ है। भारत सरकार के आधिकारिक रुख के अनुसार, 18 अगस्त 1945 को ताइपेई में विमान दुर्घटना में लगी चोटों के कारण नेताजी की मृत्यु हुई थी। बताया जाता है कि दुर्घटना के बाद उनके पार्थिव अवशेषों का जापान में अंतिम संस्कार किया गया और उनकी अस्थियां बाद में टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी गईं।
हालांकि, नेताजी की मृत्यु की परिस्थितियों पर अलग-अलग जांच समितियों और आयोगों की राय अलग रही है। शाहनवाज समिति और न्यायमूर्ति जी.डी. खोसला आयोग ने विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु के निष्कर्ष को स्वीकार किया था। वहीं, न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग ने 2005 में विमान दुर्घटना की थ्योरी को खारिज कर दिया था। केंद्र सरकार ने हालांकि इस निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया।
अस्थियों की पहचान को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अनीता बोस फाफ ने पहले डीएनए जांच की संभावना का समर्थन किया था, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इतने पुराने अवशेषों से उपयोगी डीएनए प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
अब सुप्रीम कोर्ट के केंद्र से जवाब मांगने के बाद इस ऐतिहासिक मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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