SIR पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: अनुच्छेद 324 के तहत मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार निर्वाचन आयोग को, राकेश द्विवेदी की दलील
SIR पर सुनवाई में निर्वाचन आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 और 327 के तहत मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन का अधिकार आयोग को प्राप्त है।
सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी 2025 को उन याचिकाओं पर सुनवाई फिर से शुरू की, जिनमें बिहार सहित कई राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन– एसआईआर) कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि संविधान के तहत आयोग को मतदाता सूचियों में संशोधन और पुनरीक्षण का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
याचिकाकर्ताओं के इस तर्क का विरोध करते हुए कि केवल केंद्र सरकार को ही इस तरह की प्रक्रिया का अधिकार है, श्री द्विवेदी ने संविधान के अनुच्छेद 324 और 327 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ये अनुच्छेद निर्वाचन आयोग को चुनावी प्रक्रियाओं, विशेष रूप से मतदाता सूची की तैयारी और नियंत्रण का अधिकार देते हैं। उनके अनुसार, आयोग की शक्तियां संविधान से सीधे प्राप्त हैं और इन्हें सीमित नहीं किया जा सकता।
श्री द्विवेदी ने ‘छिपे हुए नागरिकता अभियान’ और एसआईआर में मांगे जा रहे दस्तावेजों से जुड़े मुद्दों पर भी अदालत का ध्यान दिलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की शुद्धता के लिए नागरिकता एक मूलभूत तत्व है और इसकी जांच करना निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा, “मतदाता सूची में कितने विदेशी हैं, यह मायने रखता है, क्योंकि नागरिकता ही पूरे चुनावी अभ्यास का केंद्र है।”
याचिकाकर्ताओं द्वारा एसआईआर की तुलना एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) से किए जाने को उन्होंने “सिर्फ बयानबाजी” करार दिया। उनका कहना था कि एनआरसी केवल असम में लागू हुआ था, जबकि एसआईआर एक अलग और नियमित चुनावी प्रक्रिया है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं का यह कहना कि केवल केंद्र सरकार को नागरिकता सत्यापन का अधिकार है, नागरिकता अधिनियम की धारा 9(2) तक सीमित है, जो किसी भारतीय नागरिक द्वारा स्वेच्छा से दूसरी देश की नागरिकता अपनाने से संबंधित है। इस मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2025 को हो सकती है।