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सुप्रीम कोर्ट की सोशल मीडिया विनियमित करने की पहल का स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर क्या प्रभाव होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया को विनियमित करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियम स्वतंत्र अभिव्यक्ति का उल्लंघन किए बिना डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दुरुपयोग रोकने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को विनियमित करने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत का मानना है कि डिजिटल मीडिया पर उचित नियम लागू करने से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोका जा सकता है और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

विशेषज्ञों ने कहा कि सोशल मीडिया पर नए नियम बनाते समय सरकार और नियामक निकायों को स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार का विशेष ध्यान रखना होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि नियमों का निर्माण सावधानीपूर्वक नहीं किया गया, तो यह नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने हाल के वर्षों में अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। लोगों ने इसके माध्यम से राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर आवाज उठाई है। इसलिए नियम बनाने में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनी रहे और दुरुपयोग पर भी नियंत्रण हो सके।

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इस पहल के पीछे उद्देश्य है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक सामग्री, गुमराह करने वाली खबरें और अवैध गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सके। साथ ही, यह कदम सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और नागरिकों के डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह दिशा लोकतंत्र में डिजिटल अभिव्यक्ति और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।

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