चोरबागान भगदड़: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पीड़ित परिवार को दी 27 लाख रुपये की सहायता
कोलकाता के चोरबागान भगदड़ में जान गंवाने वाले शुभम सोनकार के परिवार से मिलकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 27 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को चोरबागान भगदड़ में मारे गए शुभम सोनकार के निवास स्थान पर जाकर उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरे में राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय भी उनके साथ मौजूद रहे।
परिवार से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसी भी मुआवजे से मृत्यु की भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन सरकार की पीड़ित परिवार के प्रति एक जिम्मेदारी बनती है। मुख्यमंत्री ने कहा, "आज मुआवजा दिया जाना था; हालांकि कोई मुआवजा मृत्यु की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी होती है। हमने सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और प्रधानमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये दिए हैं। उनके खाते में 27 लाख रुपये हैं, और उनके दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी। बेटे ने नौकरी खोजने में मदद मांगी है। हम अपनी ओर से जो हो सकेगा, करेंगे।"
गौरतलब है कि इससे पहले 21 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया था, जो कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ की जांच करेगा। इस हादसे में 19 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हुए थे।
और पढ़ें: भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 220 अरब डॉलर के निवेश की संभावना: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
नवगठित जांच पैनल को इस दुखद घटना की परिस्थितियों का पता लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिफारिशें देने का जिम्मा सौंपा गया है। इस उच्चस्तरीय जांच समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती करेंगी। समिति के सदस्यों में पश्चिम बंगाल सरकार के आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव तथा पश्चिम बंगाल की विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, पैनल में महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय से अतिरिक्त महानिदेशक रैंक से कम न का एक प्रतिनिधि, गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग से संयुक्त सचिव रैंक से कम न का एक प्रतिनिधि, तथा कोलकाता स्थित राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) का एक प्रतिनिधि भी शामिल किया गया है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, एसआईटी को इस घटना की व्यापक समीक्षा करनी होगी और आदेश जारी होने की तारीख से तीन महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी।
और पढ़ें: सऊदी अरब में फंसे भारतीय उमरा यात्रियों की वापसी के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है विदेश मंत्रालय