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मोदी के पोंगल संबोधन से संकेत: तमिलनाडु चुनाव से पहले तमिल समाज से संवाद, राष्ट्रीय एकता पर जोर

पोंगल समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने तमिल संस्कृति को भारत की साझा धरोहर बताते हुए राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया, जिसे तमिलनाडु चुनावों से पहले तमिल समाज से संवाद के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने तमिल संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक बताते हुए कहा कि यह केवल तमिलनाडु की नहीं, बल्कि पूरे भारत की साझा धरोहर है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार और तमिलनाडु की एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। डीएमके लगातार भाजपा सरकार पर “हिंदी थोपने” का आरोप लगाती रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में देश की सांस्कृतिक विविधता और एकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को दोहराते हुए कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों में निहित है। तमिल संस्कृति की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी भाषा, साहित्य और परंपराएं हजारों वर्षों से मानव सभ्यता को दिशा देती आई हैं।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रधानमंत्री का यह संबोधन आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले तमिल समाज तक पहुंच बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा लंबे समय से राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर उसे विरोध का सामना करना पड़ता रहा है।

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प्रधानमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भारतीयता किसी एक भाषा या संस्कृति तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि तमिल, हिंदी, बंगाली, मराठी या किसी भी अन्य भाषा का सम्मान करना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। पोंगल जैसे पर्वों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह संबोधन न केवल तमिल संस्कृति के सम्मान का प्रतीक था, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश भी देता है, जो वर्तमान राजनीतिक माहौल में विशेष महत्व रखता है।

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