तमिलनाडु विधानसभा ने टीईटी से छूट की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया, 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत
तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से टीईटी से छूट की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया। इसमें 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को परीक्षा से बाहर रखने की मांग की गई।
तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी से छूट देने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया। प्रस्ताव में 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी में शामिल होने से छूट देने की मांग की गई है।
यह प्रस्ताव स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने विधानसभा में पेश किया। इसमें केंद्र सरकार से बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई अधिनियम) की धारा 23 में आवश्यक संशोधन करने के लिए कानूनी कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार, उन शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जानी चाहिए, जिनकी नियुक्ति 23 अगस्त 2010 से पहले हो चुकी थी। राज्य सरकार का तर्क है कि ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों के तहत हुई थी, इसलिए बाद में लागू की गई पात्रता परीक्षा की शर्त उन पर लागू नहीं की जानी चाहिए।
तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। इसके साथ ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के माध्यम से एक परिपत्र या अधिसूचना जारी करने का भी आग्रह किया गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि लंबे समय से सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से जुड़ी समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। प्रस्ताव के जरिए केंद्र से स्पष्ट नियम जारी करने की मांग की गई है, ताकि पुराने शिक्षकों की सेवा और नियुक्ति से संबंधित स्थिति स्पष्ट हो सके।
विधानसभा में प्रस्ताव का सर्वसम्मति से पारित होना इस मुद्दे पर राज्य में व्यापक राजनीतिक सहमति को दर्शाता है। अब प्रस्ताव को केंद्र सरकार के समक्ष भेजे जाने की उम्मीद है।
टीईटी शिक्षकों की पात्रता निर्धारित करने वाली महत्वपूर्ण परीक्षा है। शिक्षा क्षेत्र में इसकी भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। तमिलनाडु सरकार ने अब केंद्र से आरटीई अधिनियम में संशोधन कर 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को स्पष्ट छूट देने की मांग की है।