तमिलनाडु में बायोगैस उत्पादन की राज्यव्यापी योजना बनाने की मांग, मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
मद्रास हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में तमिलनाडु सरकार से जैविक कचरे से बायोगैस उत्पादन की व्यापक योजना बनाने और चेन्नई में पायलट परियोजना शुरू करने की मांग की गई।
तमिलनाडु में जैविक कचरे से बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मद्रास हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में राज्य सरकार को स्थानीय निकायों और विभिन्न कल्याणकारी विभागों के माध्यम से विकेंद्रीकृत बायोगैस उत्पादन के लिए एक व्यापक राज्य स्तरीय योजना तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
यह याचिका सोमवार, 15 जून 2026 को मद्रास हाईकोर्ट की प्रथम खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है। इस पीठ का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन कर रहे हैं।
चेन्नई के मडिपक्कम निवासी एस.पी. सुरेंद्रनाथ कार्तिक ने यह जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि जैविक और गीले कचरे से बायोगैस का उत्पादन पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। उनका तर्क है कि राज्य सरकार को इस दिशा में ठोस नीति बनाकर स्थानीय स्तर पर बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि किसी भी राज्यव्यापी नीति को लागू करने से पहले विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए। यह समिति तकनीकी, पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें दे। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया है कि योजना को पूरे राज्य में लागू करने से पहले ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन क्षेत्र में एक पायलट परियोजना शुरू की जाए, ताकि इसकी व्यवहारिकता और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जा सके।
याचिका में कहा गया है कि बायोडिग्रेडेबल गीले कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन न केवल कचरा निपटान की समस्या को कम करेगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद करेगा। अब इस मामले पर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।
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