तमिलनाडु में 1,012 करोड़ रुपये के दो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टरों को केंद्र की मंजूरी
केंद्र सरकार ने तमिलनाडु में 1,012 करोड़ रुपये के दो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टरों को मंजूरी दी है, जिससे निवेश, रोजगार, सेमीकंडक्टर उद्योग और डिजिटल नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने तमिलनाडु में 1,012 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले दो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टरों (ईएमसी) को मंजूरी प्रदान की है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और देश को इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासों को गति देना है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी।
स्वीकृत दोनों क्लस्टर मनल्लूर और पिल्लापैक्कम में विकसित किए जाएंगे। मनल्लूर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर 474.3 एकड़ क्षेत्र में स्थापित होगा, जिसकी परियोजना लागत 587.47 करोड़ रुपये है। वहीं पिल्लापैक्कम क्लस्टर 379.3 एकड़ क्षेत्र में 424.55 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और नए निवेश आकर्षित होंगे।
सरकार के अनुसार, पिछले एक दशक में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में उदारीकरण, कर सुधार और श्रम सुधारों के कारण भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। वर्ष 2014-15 में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर 2025-26 में करीब 13.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया। मोबाइल फोन उत्पादन 6.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि इसका निर्यात 2.59 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। देश में बिकने वाले लगभग 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब भारत में ही निर्मित हो रहे हैं और इस क्षेत्र में लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है।
तमिलनाडु देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्रों में उभरकर सामने आया है। कांचीपुरम, चेन्नई, चेंगलपट्टू, कृष्णागिरि, तिरुवल्लूर और कोयंबटूर जैसे जिलों में अनेक विनिर्माण इकाइयां संचालित हो रही हैं।
सरकार ने बताया कि सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ मंजूरी दी गई है, जिनमें से तीन परियोजनाओं ने व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के अंतर्गत 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं तथा 105 स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वित्तीय एवं इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन सहायता प्रदान की गई है। चेन्नई और कोयंबटूर की कई कंपनियां भी इसका लाभ उठा रही हैं।
कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए देशभर के 315 संस्थानों, जिनमें तमिलनाडु के 61 संस्थान शामिल हैं, को सहयोग दिया जा रहा है। इनमें आईआईटी मद्रास, एनआईटी तिरुचिरापल्ली, आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम, वीआईटी और अन्ना विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। सरकार ने यह भी बताया कि सेमिकॉन 2.0 कार्यक्रम तथा इंडियाएआई मिशन के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। तमिलनाडु में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दो उत्कृष्टता केंद्रों को भी मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही राज्य में 18,632 कॉमन सर्विस सेंटर नागरिकों को 800 से अधिक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
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