तमिलनाडु सरकार का बड़ा ऐलान, मुल्लापेरियार पर नए बांध का विरोध और मेकेदातु परियोजना रोकने का संकल्प
तमिलनाडु सरकार ने मुल्लापेरियार पर नए बांध के प्रस्ताव का विरोध करने और मेकेदातु परियोजना को रोकने का संकल्प दोहराया है। राज्यपाल ने विधानसभा में सरकार की नीति स्पष्ट की।
तमिलनाडु सरकार ने मुल्लापेरियार बांध को लेकर अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह केरल सरकार द्वारा नए मुल्लापेरियार बांध के निर्माण के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेगी। साथ ही, कर्नाटक की मेकेदातु परियोजना को रोकने के लिए भी सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गुरुवार को विधानसभा में अपने अभिभाषण के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुल्लापेरियार बांध क्षेत्र में आवश्यक मरम्मत कार्यों को आगे बढ़ाने और बांध के जलस्तर को बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करेगी।
राज्यपाल ने कहा कि मुल्लापेरियार बांध तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों के लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा के समान है। यह बांध सिंचाई, पेयजल और कृषि गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर 142 फीट तक बढ़ाने की अनुमति दी थी। साथ ही अदालत ने यह भी कहा था कि बांध को और मजबूत किए जाने के बाद जलस्तर को 152 फीट तक बढ़ाया जा सकता है।
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राज्यपाल ने कहा कि तमिलनाडु सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और राज्य के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस मुद्दे पर कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सक्रिय रहेगी।
अभिभाषण के दौरान राज्यपाल ने यह भी कहा कि राज्य के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मंदिरों के बेहतर प्रशासन के लिए हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (एचआर एंड सीई) में संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य मंदिरों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और आधुनिक बनाना है।
मेकेदातु परियोजना को लेकर भी तमिलनाडु ने अपना विरोध दोहराया। राज्य सरकार का मानना है कि इस परियोजना का असर कावेरी नदी के जल बंटवारे पर पड़ सकता है, जिससे तमिलनाडु के किसानों और आम लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राज्यपाल के अभिभाषण में शामिल ये घोषणाएं जल संसाधन, कृषि और अंतरराज्यीय नदी विवादों को लेकर तमिलनाडु सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती हैं।
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