तरुण तेजपाल ने गोवा की अदालत में किया आत्मसमर्पण, 2013 के दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश
तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गोवा की मापुसा अदालत में आत्मसमर्पण किया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई है।
तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने 2013 के दुष्कर्म मामले में सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 63 वर्षीय तेजपाल को अपनी सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई शुरू होने से पहले तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। तीन सप्ताह की निर्धारित अवधि मंगलवार को समाप्त हो रही है। इससे एक दिन पहले तेजपाल ने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
छह अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने तेजपाल को 2013 में अपनी पूर्व सहयोगी के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने इस मामले में 2021 में मिली उनकी बरी होने की राहत को पलट दिया था। तेजपाल ने आरोपों से इनकार करते हुए खुद को मामले में पीड़ित बताया है।
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पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपनी अपील पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने तक आत्मसमर्पण से छूट मांगी थी।
तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि उचित मामले में सुप्रीम कोर्ट आत्मसमर्पण की अनिवार्यता से छूट दे सकता है और आरोपी के आत्मसमर्पण किए बिना भी आपराधिक अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार दोषसिद्धि के आदेश को चुनौती देने से पहले आरोपी को आत्मसमर्पण करना जरूरी है। इसके लिए आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होता है।
गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि छूट के आवेदन पर मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि मामला गंभीर दुष्कर्म से जुड़ा है, जिसमें तेजपाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
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