भगवान शिव के लिए…— तथागत रॉय की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील, सायोनी घोष पर विवाद के बीच टीएमसी के 20 सांसदों की अलग गुट बनाने की मांग
टीएमसी के 20 सांसदों द्वारा अलग गुट की मांग और सायोनी घोष पर विवाद के बीच तथागत रॉय की पीएम मोदी से अपील ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी बदलाव के बीच पार्टी के टिकट पर चुने गए 20 लोकसभा सांसदों ने खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को आवेदन सौंपा है, हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित गुट का नेतृत्व काकोली घोष दस्तिदार कर रही हैं। बताया जा रहा है कि यह समूह भविष्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने पर भी विचार कर रहा है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल और दिल्ली दोनों जगह राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
इस बीच पूर्व बंगाल भाजपा अध्यक्ष तथागत रॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि वे टीएमसी सांसद सायोनी घोष को किसी भी राजनीतिक गठबंधन में शामिल न करें। उन्होंने कहा कि उन्हें अन्य टीएमसी सांसदों के संभावित एनडीए में शामिल होने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सायोनी घोष को लेकर उनका कड़ा विरोध है।
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तथागत रॉय ने आरोप लगाया कि सायोनी घोष ने पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में शिवलिंग पर कंडोम लगाने वाला मीम साझा किया था, जिसे उन्होंने धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा— “भगवान शिव के लिए… उन्हें किसी भी हालत में शामिल न करें।”
रॉय ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इस मामले में कोलकाता के रवींद्र सरोबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
टीएमसी के इन 20 सांसदों में सायोनी घोष, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, माला रॉय, शताब्दी रॉय, जून मालिया, दीपक अधिकारी समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस समूह की हाल ही में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात भी हुई है, जो पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनाव प्रभारी हैं। इससे एनडीए के साथ संभावित राजनीतिक समीकरणों की चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
यह पूरा घटनाक्रम टीएमसी के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट के रूप में देखा जा रहा है।
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