तेलंगाना में जमीन मालिकों की बढ़ी मुश्किलें, कानूनी संपत्तियां भी धारा 22A की सूची में फंसीं
तेलंगाना में कई संपत्ति मालिक अपनी खरीदी गई जमीन बेच या हस्तांतरित नहीं कर पा रहे हैं। धारा 22A प्रतिबंधित सूची में सर्वे नंबर शामिल होने से विवाद बढ़ गया है।
तेलंगाना में कई ऐसे संपत्ति मालिक परेशानी का सामना कर रहे हैं, जिन्होंने कानूनी तरीके से जमीन, मकान या फ्लैट खरीदे थे। अब वे अपनी संपत्तियों को न तो बेच पा रहे हैं, न ही गिरवी रख पा रहे हैं और न ही किसी अन्य व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कर पा रहे हैं। इसकी वजह है कि कई सर्वे नंबरों को पंजीकरण अधिनियम की धारा 22A के तहत प्रतिबंधित सूची में शामिल कर दिया गया है।
इस सूची में भूदान, वक्फ, सीलिंग से अधिक भूमि और असाइन की गई जमीनों जैसी श्रेणियां शामिल हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें इस समस्या की जानकारी तब मिलती है, जब वे अपनी संपत्ति का पंजीकरण कराने के लिए उप-पंजीयक कार्यालय (एसआरओ) पहुंचते हैं।
ऐसे ही एक मामले में हैदराबाद के पास मेडचल-मलकाजगिरी जिले के नारापल्ली निवासी 40 वर्षीय राजमिस्त्री उदयगिरी प्रसाद को परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि उन्होंने जमीन पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत खरीदी थी, लेकिन बिक्री के समय पता चला कि उनकी संपत्ति प्रतिबंधित सूची में दर्ज है।
कई संपत्ति मालिकों का कहना है कि सौदा तय होने, खरीदार मिलने और सभी दस्तावेज सही होने के बावजूद अंतिम चरण यानी पंजीकरण के समय पूरा लेनदेन रुक जाता है। इससे लोगों को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी दोनों झेलनी पड़ रही है।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार का कहना है कि दिसंबर 2023 में सत्ता संभालने के बाद उसने जानबूझकर एक इंच भी जमीन को प्रतिबंधित सूची में शामिल नहीं किया है। सरकार का दावा है कि धारा 22A के तहत दर्ज मामलों की प्रक्रिया पहले से मौजूद नियमों के आधार पर चल रही है।
विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि कई ऐसे सर्वे नंबरों को पूरी तरह प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया है, जिनमें कुछ जमीनें प्रतिबंधित श्रेणी की हो सकती हैं, लेकिन उसी क्षेत्र में मौजूद वैध निजी संपत्तियां भी प्रभावित हो रही हैं। अब प्रभावित लोग प्रशासन से रिकॉर्ड की समीक्षा और समाधान की मांग कर रहे हैं।
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