त्रिवेंद्रम फाइन आर्ट्स कॉलेज ने टी.के. पद्मिनी की कला और विरासत का आयोजन किया
त्रिवेंद्रम फाइन आर्ट्स कॉलेज ने टी.के. पद्मिनी की 57वीं पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किया; प्रिंसिपल मनोज कन्नन ने उनके नारीवादी दृष्टिकोण और जर्मन एक्सप्रेशनिज़्म के योगदान को याद किया।
त्रिवेंद्रम स्थित कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स ने कलाकार टी.के. पद्मिनी की 57वीं पुण्यतिथि पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर कॉलेज प्रिंसिपल मनोज कन्नन ने अध्यक्षीय भाषण दिया।
प्रिंसिपल कन्नन ने कहा कि पद्मिनी अपने समय से कई कदम आगे थीं। उन्होंने अपने कला कार्यों में नारीवादी दृष्टिकोण (feminist perspectives) और जर्मन एक्सप्रेशनिज़्म के तत्व को प्रभावी ढंग से समाहित किया। उनकी कला में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना का अद्भुत मिश्रण दिखाई देता था।
हालांकि पद्मिनी ने अपनी कला की शिक्षा के.सी.एस. पनिकर के मार्गदर्शन में ली, लेकिन उन्होंने अपनी विशिष्ट कलात्मक शैली और दृष्टि विकसित की। उनके चित्रों में रंगों और भावनाओं का अद्वितीय संयोजन देखा जा सकता है, जो दर्शकों को उनके विचारों और संवेदनाओं से जोड़ता है।
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कार्यक्रम में छात्रों और कला समुदाय के सदस्यों ने पद्मिनी की कला और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उनके जीवन और रचनात्मक यात्रा को याद करते हुए, आयोजकों ने बताया कि उनकी कला आज भी नए कलाकारों और कला प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
कॉलेज ने इस अवसर पर उनके प्रमुख चित्रों और कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई, जिसमें उनके विविध विषयों और तकनीकों का विस्तृत संग्रह प्रस्तुत किया गया। इस तरह के कार्यक्रम न केवल पद्मिनी की स्मृति को जीवित रखते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को कला और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करते हैं।