शिमला में निर्वासित तिब्बतियों का कैंडल मार्च, कार्यकर्ता की आत्मदाह घटना के बाद वैश्विक समर्थन की अपील
शिमला में निर्वासित तिब्बतियों ने एक कार्यकर्ता की आत्मदाह घटना के बाद कैंडल मार्च निकाला और वैश्विक समर्थन की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी तिब्बत मुद्दा उठाने की मांग की।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शनिवार को निर्वासित तिब्बतियों ने कैंडललाइट मार्च निकाला। यह मार्च एक तिब्बती कार्यकर्ता द्वारा आत्मदाह किए जाने की घटना के बाद आयोजित किया गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया और शांति पूर्वक मोमबत्तियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने इस घटना को मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया और वैश्विक समुदाय से समर्थन की अपील की।
तिब्बती कार्यकर्ता-इन-एक्साइल तेनजिन सांग्रुप ने कहा कि भारत को तिब्बत मुद्दे को और अधिक मजबूती से उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भारत इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन देता है, तो दुनिया के अन्य देश भी इस पर आवाज उठाने के लिए प्रेरित होंगे।
और पढ़ें: उत्तर प्रदेश 2047 से पहले ही विकसित राज्य बनेगा: भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से न्याय और स्वतंत्रता की मांग की।
मार्च के दौरान प्रतिभागियों ने शांति, मानवाधिकार और स्वतंत्रता के समर्थन में नारे लगाए और तिब्बत मुद्दे पर वैश्विक जागरूकता बढ़ाने की अपील की।
इस प्रदर्शन को तिब्बती समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों और चिंताओं की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। आयोजकों ने कहा कि वे भविष्य में भी शांतिपूर्ण तरीकों से अपना विरोध जारी रखेंगे और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिब्बत मुद्दे को उठाते रहेंगे।