टीएमसी में बड़ी टूट के संकेत, राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के बीजेपी संपर्क में होने के दावे से ममता की मुश्किलें बढ़ीं
टीएमसी में अंदरूनी संकट गहराया, राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के बीजेपी संपर्क में होने के दावे से हलचल तेज। 20 से अधिक सांसदों के अलग गुट बनाने की चर्चा जारी है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी कलह और गहराती जा रही है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संपर्क में होने के संकेत मिले हैं, जिससे पार्टी के भीतर विभाजन की अटकलें और तेज हो गई हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी पहले से ही संगठनात्मक संकट से गुजर रही है।
यह नया विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने एक दिन पहले ही टीएमसी और अपनी राज्यसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
इसी बीच सूत्रों के अनुसार टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 से अधिक सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। यदि इस गुट को आधिकारिक मान्यता मिलती है तो यह टीएमसी के लिए एक बड़ा संगठनात्मक संकट साबित हो सकता है।
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इस कथित समूह का नेतृत्व वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तिदार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने की बात कही है, लेकिन वे अभी भी औपचारिक रूप से टीएमसी में ही हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वे बंगाल के मतदाताओं की समस्याओं को उठाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं और केंद्र की कई योजनाएं राज्य में सही तरीके से लागू नहीं हो रही हैं।
इसी बीच पहले निष्कासित टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने भी विधानसभा में एक अलग पत्र सौंपा था, जिसमें 59 से अधिक विधायकों के समर्थन की बात कही गई थी। इस पत्र में ममता बनर्जी को पार्टी नेता के रूप में मान्यता दी गई है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया गया है।
टीएमसी में लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं और पार्टी की एकजुटता पर गंभीर संकट पैदा कर दिया है।