तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी गुट ने चुनाव आयोग से की पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा
टीएमसी के बागी गुट ने चुनाव आयोग से पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा किया। ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठे, जबकि पार्टी ने सभी दावों को खारिज किया।
पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। गुरुवार को पार्टी के बागी गुट के लगभग 10 विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया। इस गुट का नेतृत्व पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, जिन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही "असली टीएमसी" है और उन्हें पार्टी के 64 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के समक्ष सभी दस्तावेज और अपने कानूनी तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि आयोग ने उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी और जल्द ही उचित जवाब देने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका गुट पहले ही कोलकाता और नई दिल्ली में लिखित आवेदन जमा करा चुका है।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनकी लड़ाई परिवारवाद और व्यक्तिवादी राजनीति के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में "सिंडिकेट व्यवस्था" हावी हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके गुट ने अरूप रॉय को अपना प्रमुख नियुक्त किया है।
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इस घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। बागी गुट ने 22 जून को अलग राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन की घोषणा की थी, जिसमें 30 सदस्य और 10 सदस्यीय उपसमिति शामिल है। गुट ने ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने और उनकी जगह अरूप रॉय को नियुक्त करने का भी दावा किया। इसके अलावा अभिषेक बनर्जी को भी पार्टी से हटाने की घोषणा की गई।
हालांकि, टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि पार्टी से निष्कासित व्यक्ति को कोई विशेष बैठक बुलाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ही पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और बागी गुट की बैठक महज "कॉमेडी शो" है। अब चुनाव आयोग दोनों पक्षों द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों की जांच के बाद अपना निर्णय देगा।