तृणमूल छोड़ भाजपा में आए सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश बराइक राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित
तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश बराइक पश्चिम बंगाल से भाजपा उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए। तीनों नेताओं को पश्चिम बंगाल से भाजपा उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध चुना गया।
निर्वाचन अधिकारी ने निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा के बाद तीनों नवनिर्वाचित सांसदों को निर्वाचन प्रमाणपत्र सौंप दिए। इससे पहले 9 जुलाई को कोलकाता में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के कुछ ही घंटों बाद पार्टी ने तीनों नेताओं को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था।
सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के खराब प्रदर्शन और पार्टी नेतृत्व से मतभेदों के बाद राज्यसभा की सदस्यता तथा पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
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तीनों नेताओं का भाजपा में शामिल होना ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया। अब ये तीनों नेता भाजपा के टिकट पर एक बार फिर राज्यसभा पहुंच गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा में इन नेताओं की वापसी से भाजपा को पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
सुष्मिता देव पहले भी राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रही हैं और राज्यसभा में विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। वहीं, सुखेंदु शेखर रॉय लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते रहे हैं। प्रकाश चिक बराइक का भी पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है।
तीनों नेताओं के निर्विरोध चुने जाने से पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि राज्यसभा में भाजपा के सांसद के रूप में ये नेता किस तरह की भूमिका निभाते हैं और राज्य की राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।