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28 साल पुरानी टीएमसी में बिखराव: बंगाल चुनाव के बाद ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी में अंदरूनी टूट की खबरें सामने आई हैं। 28 साल पुरानी पार्टी कई गुटों में बंटती दिख रही है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में गंभीर राजनीतिक संकट गहराता दिख रहा है। 28 साल पुरानी इस पार्टी, जिसे ममता बनर्जी ने अपने लंबे संघर्ष और मेहनत से खड़ा किया था, अब अंदरूनी टूट और गुटबाजी का सामना कर रही है।

चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ा है। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि टीएमसी अब कई गुटों में बंटती नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

घटनाक्रम की शुरुआत 22 मई को कोलकाता स्थित बंगा भवन में हुई एक अचानक मुलाकात से मानी जा रही है। यहां बागी टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बीच हुई बातचीत ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया।

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इसके बाद अगले 13 दिनों के भीतर ही पार्टी के भीतर तनाव और बढ़ गया और कई नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे। इससे पार्टी संगठन में दरारें और गहरी होती चली गईं।

सूत्रों के अनुसार, कई विधायक और स्थानीय नेता पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं और अलग-अलग गुटों में सक्रिय हो गए हैं। इससे राज्य की राजनीति में नई समीकरण बनने लगे हैं।

हालांकि ममता बनर्जी ने अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी को एकजुट रखने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि यह अंदरूनी कलह जल्द नहीं सुलझी, तो टीएमसी को आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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