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टोंक में पिता की मौत पर ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप, एक घंटे की चालान प्रक्रिया से बढ़ा विवाद

टोंक में एक व्यक्ति ने ट्रैफिक पुलिस पर पिता की तबीयत खराब होने के बावजूद चालान में देरी का आरोप लगाया। इलाज में देरी से पिता की मौत हुई, जांच जारी है।

राजस्थान के टोंक जिले में एक व्यक्ति ने अपने पिता की मौत को लेकर यातायात पुलिसकर्मी पर गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लगाए हैं। पीपलू क्षेत्र के जवाली गांव निवासी महेंद्र ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर दावा किया है कि उनके पिता शिवजी लाल यादव की तबीयत खराब होने के बावजूद ट्रैफिक पुलिस ने चालान प्रक्रिया में लगभग एक घंटे का समय लगाया, जिससे उपचार में देरी हुई और उनके पिता की मृत्यु हो गई।

महेंद्र के अनुसार, वह अपने 50 वर्षीय पिता शिवजी लाल यादव को बाइक से अस्पताल ले जा रहा था, तभी चावन क्षेत्र के छावनी तिराहे के पास यातायात पुलिसकर्मी ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी राजकुमार शर्मा ने बाइक की चाबी अपने पास रख ली और बार-बार अनुरोध करने के बावजूद वाहन छोड़ने में देरी की।

महेंद्र का कहना है कि उसने पुलिसकर्मी को अपने पिता की गंभीर हालत और अस्पताल ले जाने की आवश्यकता के बारे में कई बार बताया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इस दौरान मरीज की हालत बिगड़ती गई और उन्हें पुलिस लाइन के बाहर एक पेड़ के नीचे लेटना पड़ा।

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चालान की प्रक्रिया पूरी होने और 100 रुपये का जुर्माना भरने के बाद बाइक छोड़ी गई। इसके बाद लगभग 12:45 बजे वह अस्पताल पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन दोपहर करीब 2 बजे उनकी मृत्यु हो गई। चिकित्सकों ने भी देरी से लाने की बात कही।

वहीं पुलिसकर्मी ने सभी आरोपों को गलत बताया है। पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा ने कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच कर सत्यापन के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना सड़क सुरक्षा व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।

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