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ट्रंप ईरान से क्या चाहते हैं? अमेरिका की रणनीति और तैनाती पर सवाल

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की। ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौते की वार्ता का आग्रह किया, लेकिन उनकी नीति और उद्देश्य अस्पष्ट बने हुए हैं।

जनवरी 29, 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी विरोध प्रदर्शनों से ध्यान हटाकर ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए वार्ता की पेशकश की। यह उनके दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव था। जनवरी की शुरुआत में, जब उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी, तब उन्होंने परमाणु मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं किया था।

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में 2003 के इराक आक्रमण के बाद अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है। इसमें दो विमानवाहक युद्ध समूह, दर्जनों लड़ाकू विमान, युद्धपोत, ईंधन भरने वाले विमान और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली शामिल हैं। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो वह बल का उपयोग करेंगे।

फिर भी, तैनाती के उद्देश्य और अमेरिका की अपेक्षाओं को लेकर ट्रंप के संकेत मिश्रित हैं। क्या अमेरिका ईरान में इराक और अफगानिस्तान की तरह शासन परिवर्तन चाहता है? क्या वर्तमान तनाव ईरान के घरेलू विरोध प्रदर्शनों, उसके परमाणु कार्यक्रम या मिसाइल विकास के कारण है?

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अब तक ट्रंप ने अपनी ईरान नीति का स्पष्ट और संगठित उद्देश्य नहीं बताया है। उनके बयान और सैन्य तैनाती से यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि वॉशिंगटन ईरान से वास्तव में क्या चाहता है और वह किन शर्तों पर कार्रवाई करने को तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह तैनाती क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने, ईरान की परमाणु क्षमता और मिसाइल कार्यक्रम पर दबाव डालने के उद्देश्य से है, लेकिन अस्पष्ट नीति से वैश्विक सुरक्षा पर अनिश्चितता बढ़ रही है।

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