ईरान नीति को लेकर ट्रंप प्रशासन में मतभेद, वेंस और रुबियो के बयानों में अंतर आया सामने
ईरान नीति और इजरायल-लेबनान संघर्ष को लेकर ट्रंप प्रशासन में जेडी वेंस और मार्को रुबियो के बयानों में मतभेद सामने आए हैं, जिससे नीति की एकजुटता पर सवाल उठे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनकी टीम ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर पूरी तरह एकजुट है, लेकिन हाल के बयानों ने उनके प्रशासन के भीतर मतभेदों की ओर इशारा किया है। पिछले एक सप्ताह में ट्रंप के दो सबसे करीबी सहयोगियों—उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो—के विचारों में स्पष्ट अंतर देखने को मिला है।
रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस में उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायली सैन्य कार्रवाई अमेरिका की शांति कोशिशों को कमजोर कर सकती है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकती है।
इसके विपरीत, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजरायल के सैन्य अभियानों का खुलकर समर्थन किया है। खाड़ी देशों की यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि इजरायल केवल हिजबुल्लाह के हमलों का जवाब दे रहा है और यह उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। उन्होंने इजरायली चौकियों पर हुए हमलों का भी उल्लेख किया।
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ईरान नीति को लेकर भी दोनों नेताओं के दृष्टिकोण अलग दिखाई दिए। जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि समझौते के बाद खाड़ी देश ईरान के पुनर्निर्माण में सहयोग कर सकते हैं।
वहीं मार्को रुबियो ने यूएई, कुवैत और बहरीन के दौरे के दौरान स्पष्ट कहा कि अमेरिका किसी भी समझौते में अपने और अपने सहयोगियों के हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी वित्तीय सहायता अभी दूर की बात है।
इन बयानों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या वाकई ट्रंप प्रशासन ईरान नीति को लेकर पूरी तरह एकजुट है या फिर शीर्ष नेतृत्व के बीच रणनीतिक मतभेद मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन अलग-अलग दृष्टिकोणों से अमेरिकी विदेश नीति की दिशा पर असर पड़ सकता है।