ट्रंप ने शी जिनपिंग से पूछा- क्या चीन अमेरिकी हथियार खरीदेगा? जानिए क्यों असामान्य है यह पेशकश
डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग से अमेरिकी हथियार खरीदने की इच्छा पूछने की बात कही। चीन को हथियार बिक्री कानूनी रूप से प्रतिबंधित है, जबकि ताइवान मुद्दा विवादित बना हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से यह पूछे जाने की खबर सामने आई है कि क्या चीन अमेरिका से हथियार खरीदना चाहता है। अमेरिका के चीन में राजदूत डेविड पर्ड्यू ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्रंप चीन को अमेरिकी हथियार बेचने की संभावना का उल्लेख उस समय कर रहे थे, जब वह ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर शी को समझा रहे थे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ने यह बात कब कही और क्या यह वास्तविक प्रस्ताव था।
यह टिप्पणी इसलिए असामान्य मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच सैन्य तकनीक और हथियारों को लेकर लंबे समय से कड़े प्रतिबंध हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने बाद में स्पष्ट किया कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है और चीन को हथियार बेचने की कोई योजना या प्रस्ताव नहीं है।
एफ-35 के पुर्जों ने बढ़ाई चिंता
इसी बीच अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया एक अलग मामले की जांच कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका भेजे जा रहे एफ-35 लड़ाकू विमान के कुछ पुर्जे रास्ते में हांगकांग पहुंच गए। पेंटागन ने कहा है कि उसे अनुपयोगी एफ-35 उपकरणों की खेप से जुड़ी समस्या की जानकारी है और वह पुर्जों को वापस हासिल करने तथा घटना की जांच करने में जुटा है।
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रिपोर्टों के अनुसार, खेप में कॉकपिट कैनोपी और हथियार बे का दरवाजा शामिल था। हांगकांग चीन का हिस्सा है, इसलिए इस घटना ने अमेरिकी सैन्य तकनीक की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार इसमें संवेदनशील उपकरण शामिल नहीं थे। अभी तक यह सार्वजनिक रूप से साबित नहीं हुआ है कि चीनी अधिकारियों ने इन पुर्जों की जांच की या उनसे तकनीकी जानकारी हासिल की।
ताइवान हथियार बिक्री बनी अहम मुद्दा
ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर मतभेद जारी हैं। चीन अमेरिकी हथियार बिक्री का विरोध करता है, जबकि अमेरिका ताइवान को रक्षा संबंधी हथियार उपलब्ध कराता रहा है। करीब 14 अरब डॉलर का प्रस्तावित हथियार पैकेज भी चर्चा में है। शी ने वाशिंगटन यात्रा के दौरान ताइवान के मुद्दे पर अमेरिकी नीति बदलने की मांग की थी।
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