ट्विशा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, बेहतर है तलाकशुदा बेटी हो, लेकिन मृत नहीं बयान पर चर्चा
ट्विशा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। सुनवाई में संस्थागत पक्षपात और जांच में खामियों पर गंभीर सवाल उठे, जिससे मामला राष्ट्रीय चर्चा में है।
ट्विशा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की। यह मामला अब एक बड़े कानूनी मोड़ पर पहुंच सकता है, क्योंकि इसमें जांच प्रक्रिया में संस्थागत पक्षपात, प्रक्रियात्मक खामियों और गंभीर अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं।
ट्विशा शर्मा, जो 32 वर्षीय अभिनेत्री और मॉडल थीं, 12 मई को मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। इस घटना के बाद उनके परिवार ने उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और हत्या के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने इस केस को “ससुराल में एक युवती की संदिग्ध मौत में संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियात्मक विसंगतियों” से जुड़ा मामला बताया है।
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मामले में शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज की जांच और जांच में देरी को लेकर कई सवाल उठे हैं। इसके अलावा एम्स दिल्ली की टीम द्वारा किए गए दूसरे पोस्टमार्टम ने मामले को और अधिक जटिल बना दिया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, “बेहतर है कि बेटी तलाकशुदा हो, लेकिन मृत नहीं।” इस बयान ने अदालत और बाहर दोनों जगह व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान की गई कोई भी टिप्पणी आरोपों पर राय नहीं मानी जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से सभी पहलुओं की जांच करनी होगी और अंतिम निष्कर्ष उन्हीं के आधार पर निकाले जाएंगे।
फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर टिकी हैं।
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