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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में यूएई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे अबू धाबी के क्राउन प्रिंस

अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद अल नहयान इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में यूएई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जहां वैश्विक एआई सहयोग और नीति ढांचे पर चर्चा होगी।

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की ओर से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद अल नहयान 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में यूएई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस उच्चस्तरीय भागीदारी का उद्देश्य उन्नत प्रौद्योगिकियों में वैश्विक सहयोग को मजबूत करना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभावी उपयोग के लिए रणनीतिक साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

यूएई की भागीदारी का मुख्य फोकस एआई आधारित समाधानों के माध्यम से सतत विकास को प्रोत्साहित करना और प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार की गति को तेज करना है। अधिकारियों के अनुसार, एआई स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा और डिजिटल प्रशासन जैसे क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।

यह समिट 100 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, सरकार प्रमुखों, नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य एआई शासन के लिए वैश्विक ढांचे तैयार करना और इस तकनीक के जिम्मेदार एवं सुरक्षित उपयोग पर सहमति बनाना है।

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चर्चाओं में एआई की रणनीतिक प्राथमिकताओं, नियामकीय मानकों और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, सम्मेलन में कई पैनल चर्चाएं और विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जाएंगे, जहां उद्योग और नीति जगत के दिग्गज अपने विचार साझा करेंगे।

समिट के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें 30 देशों की 300 से अधिक अग्रणी एआई कंपनियां अपनी नवीनतम तकनीकी उपलब्धियों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी। यह मंच वैश्विक निवेश, सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से एआई के क्षेत्र में वैश्विक सहमति और संतुलित नीतिगत ढांचे के निर्माण में मदद मिलेगी। भारत और यूएई के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक और तकनीकी संबंध हैं, और यह समिट दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और गहरा कर सकता है।

नई दिल्ली में आयोजित यह आयोजन वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र को दिशा देने और नवाचार, नीति तथा विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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