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केरल में सत्ता विरोधी लहर, यूडीएफ ने एलडीएफ के दशकभर के वर्चस्व को तोड़ा

केरल में सत्ता विरोधी लहर के बीच यूडीएफ ने 71 सीटों के साथ बहुमत पार किया। एलडीएफ का दशकभर का शासन खत्म होता दिखा, कांग्रेस गठबंधन की वापसी तय।

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता विरोधी लहर स्पष्ट रूप से देखने को मिली है, जहां संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त कर दिया है। मतगणना के रुझानों के अनुसार 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ ने आराम से 71 सीटों का बहुमत आंकड़ा पार कर लिया है।

यह परिणाम राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। पिछले एक दशक से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के नेतृत्व में चल रही सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष नजर आ रहा था, जो अब चुनाव परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह जनादेश एलडीएफ की नीतियों और शासन शैली के प्रति जनता की नाराजगी को दर्शाता है।

यूडीएफ, जिसका नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कर रही है, इस जीत के साथ राज्य की सत्ता में वापसी की ओर बढ़ता दिख रहा है। कांग्रेस नेताओं ने इसे जनता के विश्वास की जीत बताया है और कहा है कि वे राज्य के विकास और कल्याण के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करेंगे।

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मतगणना के दौरान विभिन्न जिलों से आए रुझानों में यूडीएफ को लगातार बढ़त मिलती रही, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस बार मतदाताओं ने बदलाव का मन बना लिया था। वहीं एलडीएफ के नेताओं ने परिणामों को स्वीकार करते हुए कहा है कि वे जनता के फैसले का सम्मान करते हैं।

यह चुनाव परिणाम केरल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जहां लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन की स्थिति बनती दिख रही है। आने वाले अंतिम परिणाम इस तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे, लेकिन फिलहाल यूडीएफ की वापसी लगभग तय मानी जा रही है।

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