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रूसी हमलों के बाद यूक्रेन ने ऊर्जा आयात बढ़ाने का आदेश दिया, बिजली संकट गहराया

रूसी ड्रोन-मिसाइल हमलों से बिजली ढांचे को भारी नुकसान के बाद यूक्रेन ने विदेशों से बिजली आयात बढ़ाने का आदेश दिया, क्योंकि ठंड और अंधेरे से लाखों लोग प्रभावित हैं।

रूस की ओर से लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण यूक्रेन में गहराते ऊर्जा संकट के बीच देश के नए ऊर्जा मंत्री ने विदेशों से बिजली आयात को तेज करने का आदेश दिया है। शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को ऊर्जा मंत्री डेनिस श्मिगाल ने कहा कि युद्ध के कारण राष्ट्रीय बिजली ग्रिड पर भारी दबाव बना हुआ है और हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।

बीते कुछ दिनों में रूसी हमलों से कई बिजली संयंत्र और सबस्टेशन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। इंजीनियर और राहतकर्मी शून्य से नीचे तापमान में काम करते हुए बिजली आपूर्ति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। कई इलाकों में तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए हैं।

ऊर्जा मंत्री ने एक बयान में कहा कि सरकारी कंपनियों, विशेष रूप से यूक्रेनियन रेलवे और नाफ्टोगैज को 2025-26 के हीटिंग सीजन के दौरान तत्काल बिजली आयात सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल खपत का कम से कम 50 प्रतिशत बिजली आयात के जरिए पूरा किया जाना चाहिए। हालांकि, युद्धकालीन संवेदनशीलता का हवाला देते हुए सरकार ने यह नहीं बताया कि यूक्रेन फिलहाल कितनी बिजली का उत्पादन या आयात कर रहा है।

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हालिया रूसी हमलों के कारण पूरे-पूरे शहर अंधेरे में डूब गए हैं और लाखों लोग या तो बिना हीटिंग के हैं या फिर सीमित बिजली आपूर्ति पर निर्भर हैं। कीव में ट्रैफिक सिग्नल बंद, दुकानें और रेस्तरां बंद तथा लोगों को सरकारी टेंटों में खुद को गर्म करते और मोबाइल चार्ज करते देखा।

राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने गुरुवार को बताया कि खारकीव शहर में हुए हवाई हमलों के बाद करीब 4 लाख लोग बिजली से वंचित हो गए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री यूलिया स्विरीडेन्को ने घोषणा की कि 2022 में लागू सख्त कर्फ्यू नियमों में ढील दी जाएगी ताकि लोग आपातकालीन हीटिंग और बिजली केंद्रों तक पहुंच सकें।

उधर, क्रेमलिन का दावा है कि रूसी हमले केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं और नागरिकों की परेशानी के लिए कीव सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।

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