उन्नाव बलात्कार मामला: पीड़िता के पिता की मौत केस में सेंगर की सजा निलंबन याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की 10 साल की सजा निलंबन याचिका खारिज कर दी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (19 जनवरी 2026) को उन्नाव बलात्कार कांड से जुड़े एक अहम मामले में निष्कासित भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका दिया। अदालत ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में दी गई 10 साल की सजा को निलंबित करने की सेंगर की याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा ने कहा, “राहत देने के लिए कोई आधार नहीं बनता। सजा निलंबन की मांग करने वाली याचिका खारिज की जाती है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि सेंगर लंबे समय से जेल में हैं, लेकिन केवल देरी के आधार पर उन्हें राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि इस देरी के लिए वह स्वयं भी आंशिक रूप से जिम्मेदार हैं। अदालत के अनुसार, सेंगर ने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील में कई आवेदन दायर किए, जिससे सुनवाई में विलंब हुआ।
हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय का उद्देश्य अपील की शीघ्र सुनवाई से पूरा होगा और मामले को 3 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
गौरतलब है कि 13 मार्च 2020 को एक ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास और ₹10 लाख जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि एक परिवार के “एकमात्र कमाने वाले सदस्य” की मौत के मामले में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।
इसी मामले में सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य आरोपियों को भी 10-10 साल की जेल की सजा दी गई थी। पीड़िता के पिता को सेंगर के इशारे पर आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था और 9 अप्रैल 2018 को पुलिस की कथित बर्बरता के कारण हिरासत में उनकी मौत हो गई थी।
सेंगर पर वर्ष 2017 में नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार का भी आरोप है। बलात्कार मामले में उन्हें दिसंबर 2019 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इन दोनों मामलों में उनकी अपीलें फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं।
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