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उत्तर प्रदेश में करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं को मिल सकता है SIR सुनवाई का नोटिस

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई नोटिस मिल सकता है, जिनमें 2003 सूची से मिलान न होने और डेटा विसंगतियों वाले नाम शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) प्रक्रिया के तहत राज्य के करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस भेजे जाने की संभावना है। ये वे मतदाता हैं जिनके नाम गणना चरण के पूरा होने के बाद जारी की गई प्रारूप मतदाता सूची में दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 12.55 करोड़ है।

राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इन 3.26 करोड़ मतदाताओं में से करीब 1.04 करोड़ लोगों के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से जोड़े (मैप) नहीं जा सके। वर्ष 2003 में ही पिछली बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया कराई गई थी। उस समय तैयार की गई सूची से मौजूदा डेटा का मिलान करने में इन मतदाताओं का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाया।

इसके अलावा, लगभग 2.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में “तार्किक विसंगतियां” (लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी) पाई गई हैं। इसका मतलब है कि नाम, आयु, पता या अन्य विवरणों में ऐसी असंगतियां सामने आई हैं, जिनके कारण मतदाता डेटा का सही ढंग से मिलान नहीं हो सका।

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निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों में मतदाताओं को नोटिस भेजकर व्यक्तिगत रूप से या निर्धारित स्थानों पर सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। सुनवाई के दौरान संबंधित मतदाता अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं, ताकि उनके नाम मतदाता सूची में सही तरीके से शामिल किए जा सकें या आवश्यक सुधार किए जा सकें।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है, ताकि भविष्य के चुनावों में किसी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की गुंजाइश न रहे। निर्वाचन आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने और योग्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

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