यूपीआई पर उपयोगकर्ताओं से कोई शुल्क नहीं, ज्यादातर लेनदेन व्यापारियों के लिए भी रहेंगे मुफ्त
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई भुगतान पर उपयोगकर्ताओं और छोटे व्यापारियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। अधिकांश व्यापारी लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे, जबकि सीमित लेनदेन पर एमडीआर लागू हो सकता है।
यूपीआई भुगतान पर 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए शुल्क लगाए जाने की अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि उपयोगकर्ताओं और छोटे व्यापारियों से यूपीआई लेनदेन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, अधिकांश व्यापारी लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे।
हालांकि, भविष्य में कुछ निर्धारित सीमा से अधिक के चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर मामूली व्यापारी छूट दर लागू की जा सकती है। लोकसभा ने 6 अगस्त को भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से संबंधित विधेयक पारित किया था। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं से भुगतान करने के लिए कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले सभी लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे। यदि व्यापारी छूट दर लागू की जाती है, तो यह केवल सीमित श्रेणी के लेनदेन पर होगी और डेबिट या क्रेडिट कार्ड की दरों की तुलना में काफी कम होगी।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई पर व्यापारियों के अधिकांश लेनदेन शुल्क-मुक्त रहेंगे। प्रस्तावित व्यापारी छूट दर सभी व्यापारियों पर एक समान तरीके से लागू नहीं होगी, बल्कि निर्धारित सीमा के आधार पर होगी। कराधान और अन्य कानून संशोधन विधेयक, 2026 को संसद की मंजूरी मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के नेतृत्व वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति तय करेगी कि व्यापारी छूट दर लागू की जाए या नहीं।
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सरकार के अनुसार, भुगतान प्रणाली में लगातार बढ़ते लेनदेन के कारण साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश की जरूरत है। संशोधन का उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी विकास और उभरते जोखिमों से निपटने की क्षमता मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि अधिक कंपनियों को इस क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल जरूरी है और केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता भविष्य की वृद्धि के लिए पर्याप्त नहीं होगी।
हालांकि, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सरकार के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यापारी अंततः इन लागतों का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं। उनका दावा है कि कीमतों में बढ़ोतरी या अलग-अलग मूल्य निर्धारण के जरिए उपभोक्ताओं से अतिरिक्त लागत वसूली जा सकती है। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारी, किराना दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले यूपीआई के विस्तार की रीढ़ हैं।
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