अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत के साथ रक्षा, व्यापार और तकनीक सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया
भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति मुर्मू को परिचय पत्र सौंपे। उन्होंने रक्षा, व्यापार और तकनीक में सहयोग बढ़ाने और भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई देने की बात कही।
भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रक्षा, व्यापार, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प जताया है। बुधवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) सौंपे। इसके साथ ही सर्जियो गोर औपचारिक रूप से भारत में अमेरिका के 27वें राजदूत बन गए।
इस अवसर पर राजदूत गोर ने कहा, “राष्ट्रपति मुर्मू को अपने परिचय पत्र सौंपना मेरे लिए सम्मान की बात है। ऐसे समय में भारत में सेवा करना गौरवपूर्ण है, जब भारत-अमेरिका संबंधों में अपार संभावनाएं और अवसर हैं। मैं भारत सरकार और भारतीय जनता के साथ मिलकर रक्षा, व्यापार, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों सहित साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और दुनिया की दो महान लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के लिए उत्सुक हूं।”
नई दिल्ली में कार्यभार संभालने से पहले सर्जियो गोर व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के सहायक और प्रेसिडेंशियल पर्सनल के निदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं। राष्ट्रपति भवन ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने त्रिनिदाद और टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदत्त सिंह, ऑस्ट्रिया के राजदूत डॉ. रॉबर्ट ज़िश्ग और अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से परिचय पत्र प्राप्त किए।
और पढ़ें: सिख अलगाववादी नेता की हत्या पर कनाडा के आरोप भारत ने किए खारिज
राजदूत गोर ने कुछ दिन पहले ही नई दिल्ली में पदभार संभाला था। सोमवार को उन्होंने राजधानी स्थित अमेरिकी दूतावास में नए अमेरिकी राजदूत के रूप में शपथ ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मित्रता वास्तविक है और सच्चे मित्र मतभेद होने के बावजूद उन्हें सुलझा लेते हैं।
उन्होंने भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडा पर काम करेंगे। सर्जियो गोर एक जाने-माने अमेरिकी कारोबारी और राजनीतिक रणनीतिकार हैं और संचार के क्षेत्र में कई सरकारी संगठनों के साथ काम कर चुके हैं।
और पढ़ें: आतंकवाद पर 40 साल से कार्रवाई में नाकाम रहा कनाडा: भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक