डाबर के सिलवासा संयंत्र पर अमेरिकी एफडीए की आपत्तियां, कंपनी ने दी सफाई
यूएस एफडीए ने डाबर के सिलवासा संयंत्र में डेटा प्रबंधन और स्वच्छता संबंधी कमियां बताई हैं। डाबर ने सफाई देते हुए कहा कि उत्पादों की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ा।
भारतीय उपभोक्ता उत्पाद कंपनी डाबर इंडिया का दादरा और नगर हवेली स्थित सिलवासा विनिर्माण संयंत्र अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएस एफडीए) की जांच के बाद चर्चा में आ गया है। अमेरिकी नियामक संस्था ने संयंत्र में विनिर्माण प्रक्रियाओं, डेटा अखंडता, रखरखाव और स्वच्छता से जुड़ी कई कमियों की ओर ध्यान दिलाया है। यह निरीक्षण जनवरी 2026 में किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, संयंत्र में रिकॉर्ड रखने और डेटा प्रबंधन से संबंधित गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। नियामक ने आरोप लगाया कि कुछ विनिर्माण रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर किया गया, जिससे यह छिपाया जा सके कि कुछ उपकरणों का उपयोग स्वीकृत उत्पादों के अलावा अन्य उत्पादों के निर्माण में भी किया गया था। ऐसे मामलों को गुणवत्ता और नियामक अनुपालन के लिहाज से गंभीर माना जाता है।
निरीक्षण के दौरान स्वच्छता संबंधी चिंताएं भी सामने आईं। रिपोर्ट में कहा गया कि कच्चे माल के गोदाम में पैकेजिंग सामग्री के पास पक्षियों की बीट पाई गई। इसके अलावा, कुछ नमूनों के संबंध में कंपनी के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर भी देखा गया। जहां रिकॉर्ड में नमूनों को गुणवत्ता जांच में सफल बताया गया था, वहीं निरीक्षण के दौरान उनमें संदूषण के संकेत मिले।
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हालांकि, डाबर इंडिया ने इन आरोपों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को भेजे पत्र में कहा कि सिलवासा संयंत्र मुख्य रूप से निर्यात के लिए पेट्रोलियम जेली का उत्पादन करता है। कंपनी के अनुसार, पक्षियों की बीट जिस स्थान पर मिली, वह उत्पादन क्षेत्र से काफी दूर था और इसका निर्माण प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
डाबर ने यह भी स्पष्ट किया कि यूएस एफडीए को निरीक्षण के दौरान किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता में कोई खामी नहीं मिली। कंपनी का दावा है कि किसी भी तैयार उत्पाद को खराब या असुरक्षित नहीं पाया गया।
कंपनी ने आश्वासन दिया कि यूएस एफडीए द्वारा सुझाए गए सभी सुधारात्मक कदमों को लागू किया जा रहा है और वह उच्च गुणवत्ता मानकों तथा नियामक अनुपालन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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