×
 
☰

अमेरिकी इमिग्रेशन सख्ती: भारतीय आईटी कंपनियों ने इस स्थिति के लिए वर्षों पहले से की तैयारी

भारतीय आईटी कंपनियों ने स्थानीय भर्ती, भारत से सेवाएं देने और नजदीकी देशों में केंद्र स्थापित करने की रणनीति अपनाई। इससे अमेरिकी वीजा नियमों की सख्ती का तत्काल प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।

अमेरिका में इमिग्रेशन नियमों को सख्त किए जाने के बीच भारतीय आईटी कंपनियों की वर्षों पुरानी रणनीति अब उनके लिए मददगार साबित हो रही है। इन कंपनियों ने अमेरिकी वर्क वीजा पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाई और दूसरे देशों में अपने कारोबार का विस्तार किया। इससे अमेरिका के हालिया ग्रीन कार्ड कार्यक्रम पर रोक का तत्काल असर सीमित रहने की संभावना है।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा कई भारतीय आईटी कंपनियों को अमेरिका के एक प्रमुख ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित किए जाने से पहले ही इन कंपनियों ने अपनी रणनीति में बदलाव शुरू कर दिया था। उन्होंने अमेरिकी बाजार में स्थानीय कर्मचारियों की नियुक्ति बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे देशों में डिलीवरी सेंटर स्थापित किए, जो उनके सबसे बड़े विदेशी बाजार अमेरिका के नजदीक हैं।

कई वर्षों तक भारतीय आईटी सेवा कंपनियों का कारोबारी मॉडल अपेक्षाकृत सरल रहा। वे विदेशी ग्राहकों के नियमित काम भारत से पूरा करती थीं, जबकि जटिल परियोजनाओं को संभालने और ग्राहकों के साथ संबंध मजबूत करने के लिए अनुभवी इंजीनियरों को उनके कार्यालयों में भेजा जाता था।

और पढ़ें: अमेरिका में H-1B पर बड़ी कार्रवाई, इंफोसिस-TCS समेत 8 आईटी कंपनियां ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित

हालांकि, समय के साथ अमेरिका ने एच-1बी वीजा से जुड़े नियमों को सख्त करना शुरू किया। इसी दौरान भारतीय आईटी कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर अपना कारोबार बढ़ाया और अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया। उन्होंने अधिक काम भारत जैसे देशों में स्थित केंद्रों से करना शुरू किया और अमेरिका तथा यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाई।

इस रणनीति का उद्देश्य विदेशी ग्राहकों को सेवाएं देने के लिए कर्मचारियों को लगातार दूसरे देशों में भेजने की जरूरत कम करना था। साथ ही, स्थानीय नियुक्तियों और नजदीकी देशों में संचालन केंद्रों के विस्तार से कंपनियों को बदलते इमिग्रेशन नियमों के बीच अपना काम जारी रखने में मदद मिली।

इस तरह, अमेरिकी वीजा नीतियों में मौजूदा सख्ती भारतीय आईटी उद्योग के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन वर्षों से किए गए बदलावों ने कंपनियों की तत्काल निर्भरता को काफी हद तक कम किया है।

और पढ़ें: अमेरिका में EB-5 निवेशक वीजा की फीस 30 नवंबर से दोगुनी से ज्यादा, भारतीयों पर बढ़ेगा खर्च

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share