उत्तराखंड में मानसून तैयारी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू, आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर
देहरादून में मानसून तैयारी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। इसमें आपदा प्रबंधन, बाढ़, भूस्खलन और राहत-बचाव कार्यों को मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा की जाएगी।
मानसून के मौसम को देखते हुए आपदा प्रबंधन और पूर्व तैयारियों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन शुरू हुआ। यह कार्यशाला उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) भवन, आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने और सड़क अवरोध जैसी घटनाओं से निपटने के लिए विभिन्न राज्यों और एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। कार्यक्रम में देशभर के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी, मौसम वैज्ञानिक और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि मानसून के दौरान पहाड़ी राज्यों में जोखिम काफी बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते तैयारी, बेहतर संचार व्यवस्था और त्वरित राहत एवं बचाव अभियान बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। कार्यशाला में आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली, आपातकालीन प्रतिक्रिया, राहत कार्यों की रणनीति और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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उत्तराखंड सरकार और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि राज्य में हर वर्ष मानसून के दौरान कई चुनौतियां सामने आती हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए इस तरह की कार्यशालाएं अनुभव साझा करने और नई रणनीतियां तैयार करने में मददगार साबित होती हैं।
दो दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे और मानसून के दौरान जोखिम कम करने के उपायों पर विचार-विमर्श करेंगे। साथ ही आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि इस राष्ट्रीय कार्यशाला से मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को मजबूती मिलेगी और जनहानि तथा संपत्ति के नुकसान को कम करने में सहायता प्राप्त होगी।
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