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सीमा सुरक्षा को आधुनिक और जनकेंद्रित बनाने पर जोर, भूमि सीमा जिलों के एसपी सम्मेलन में शामिल हुई उत्तराखंड पुलिस

भूमि सीमा जिलों के एसपी सम्मेलन में उत्तराखंड पुलिस ने भाग लिया। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद, संगठित अपराध, वित्तीय अपराध और सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।

सीमा सुरक्षा को अधिक आधुनिक, बेहतर समन्वित और जनकेंद्रित बनाने के उद्देश्य से आयोजित भूमि सीमा जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के सम्मेलन में उत्तराखंड पुलिस ने सक्रिय भागीदारी की। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के अनुसार, सम्मेलन में देश की सीमाओं से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों और उनके प्रभावी समाधान पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयगत सत्र आयोजित किए गए, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इनमें सीमा पार आतंकवाद, संगठित अपराध, सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय अपराध, अवैध धन के प्रवाह और सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे विषय प्रमुख रहे।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया तंत्र और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की भागीदारी बढ़ाने और उनकी सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने पर भी बल दिया गया।

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उत्तराखंड पुलिस के अधिकारियों ने राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए अपनाए जा रहे उपायों की जानकारी साझा की। सम्मेलन में सीमा प्रबंधन को अधिक मजबूत बनाने, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने तथा कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

सम्मेलन में यह भी कहा गया कि वित्तीय अपराधों और अवैध धन के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए आधुनिक जांच तकनीकों और डिजिटल निगरानी प्रणाली का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा सीमावर्ती जिलों में तेजी से बदल रहे सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्वरूप पर भी गंभीरता से विचार किया गया।

उत्तराखंड पुलिस ने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन में हुई चर्चाओं और सुझावों के आधार पर सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत, प्रभावी तथा नागरिकों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सकेगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास भी सुनिश्चित होगा।

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