VB-G RAM G योजना पर बहस: क्या ग्रामीण रोजगार की गारंटी कमजोर होगी?
नई VB-G RAM G योजना पर बहस तेज है। सरकार इसे सुधार बता रही है, जबकि आलोचकों को डर है कि इससे ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर हो सकती है।
केंद्र सरकार द्वारा MGNREGA की जगह नई योजना VB-G RAM G लाने के फैसले ने ग्रामीण भारत में बड़ी बहस छेड़ दी है। सरकार इसे रोजगार योजना का उन्नत संस्करण बता रही है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर हो सकती है।
आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के बापुलापाडु मंडल के बंदारुगुडेम गांव में रहने वाली महिलाएं इस बदलाव को लेकर चिंतित हैं। 60 वर्षीय बरे जयम्मा पूछती हैं कि जब मौजूदा योजना के पूरे लाभ नहीं मिल पा रहे, तो नई योजना से क्या फायदा होगा। ग्रामीणों को बताया गया है कि रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 की जाएगी और भुगतान में देरी कम होगी, लेकिन लोगों की असली चिंता काम की उपलब्धता है।
गांव की मेदाबलिमी धनलक्ष्मी कहती हैं कि दूसरे गांवों में 100 दिन का रोजगार मिलता है, जबकि उन्हें दो हफ्ते काम के लिए भी अधिकारियों से संघर्ष करना पड़ता है। बंदारुगुडेम जैसे छोटे पंचायतों में सामुदायिक संपत्तियों की कमी के कारण काम के अवसर सीमित हैं। गांव का तालाब मछली पालन के लिए पट्टे पर दे दिया गया, जिससे मजदूरी का एक बड़ा स्रोत खत्म हो गया।
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इसके विपरीत, पास के अम्पापुरम गांव में योजना के बेहतर परिणाम दिखे हैं। यहां पशु शेड, सड़कें और खेती से जुड़े कामों ने ग्रामीणों की आय बढ़ाई है। अधिकारी बताते हैं कि कई परिवारों ने इस वर्ष 70–80% कार्य दिवस पूरे कर लिए हैं।
जिले में लाखों मानव-दिवस का रोजगार पैदा हुआ है, लेकिन गांवों के बीच असमानता साफ दिखाई देती है। आलोचकों का कहना है कि नई योजना रोजगार को अधिकार की जगह प्रशासनिक योजना बना सकती है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे किसानों और मजदूरों पर हमला बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कानूनी गारंटी कमजोर हुई, तो कमजोर वर्गों पर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों के लिए नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण रोजगार की निरंतरता और आय सुरक्षा है।
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