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वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में 2,792 एमओयू पर हस्ताक्षर, 2.82 लाख नौकरियों के सृजन की उम्मीद

वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में 2,792 एमओयू से ₹3.53 लाख करोड़ निवेश और 2.82 लाख नौकरियों की उम्मीद है। सरकार आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

गुजरात में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में निवेश और रोजगार सृजन को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। दो दिवसीय इस सम्मेलन में कुल 2,792 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनके माध्यम से लगभग ₹3,53,306 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन परियोजनाओं से करीब 2.82 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन की उम्मीद जताई जा रही है।

राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शनिवार को समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ये सभी समझौते सम्मेलन के दौरान ही अंतिम रूप दिए गए हैं और अगले तीन वर्षों में इन पर अमल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल गुजरात सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम को केवल गांधीनगर तक सीमित न रखते हुए राज्य के विभिन्न क्षेत्रों तक विस्तृत किया जा रहा है।

हर्ष संघवी ने बताया कि सरकार विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां रोजगार सृजन की अधिक संभावनाएं हैं, खासकर आदिवासी जिलों में। उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग (गारमेंट सेक्टर) इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत अगले दो वर्षों में आदिवासी क्षेत्रों की 25,000 से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

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उन्होंने कहा कि यह निवेश न केवल आर्थिक विकास को गति देगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। सरकार का उद्देश्य है कि उद्योगों का विकास संतुलित रूप से पूरे राज्य में हो और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिले।

सम्मेलन को राज्य के औद्योगिक विकास और निवेश आकर्षण के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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