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तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव की आहट? विजय की मुल्लिवाईक्कल पोस्ट से तेज हुई नई द्रविड़ राजनीति पर बहस

विजय की मुल्लिवाईक्कल पोस्ट के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई द्रविड़ विचारधारा पर बहस तेज हो गई है, जिसे राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के उभार को एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि राज्य की राजनीति पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से धीरे-धीरे एक नए मोड़ की ओर बढ़ सकती है।

लंबे समय तक तमिलनाडु की राजनीति पर द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (एआईएडीएमके) का दबदबा रहा है। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनावों में टीवीके के उभरने और कांग्रेस, वाम दलों तथा अन्य छोटे दलों के समर्थन से सरकार बनने के बाद राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं।

18 मई को मुल्लिवाईक्कल स्मरण दिवस के अवसर पर विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने वैश्विक तमिल प्रवासी समुदाय के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि “मुल्लिवाईक्कल की यादों को हम अपने दिलों में संजोकर रखेंगे और दुनिया भर में रहने वाले तमिल लोगों के अधिकारों के साथ हमेशा खड़े रहेंगे।”

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यह दिन श्रीलंकाई तमिलों द्वारा हर वर्ष 18 मई को मनाया जाता है, जो 2009 में श्रीलंका गृहयुद्ध के अंत और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन की मृत्यु से जुड़ा है।

विश्लेषकों का मानना है कि विजय द्रविड़ राजनीति और तमिल राष्ट्रवाद के बीच एक सेतु बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे कुछ लोग ‘नव-द्रविड़ राजनीति’ भी कह रहे हैं।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विजय की पोस्ट पर आपत्ति जताई है और एलटीटीई तथा राजीव गांधी हत्याकांड का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस और टीवीके ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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