विदेश सचिव मिस्री का बयान: राष्ट्रीय हितों से तय होंगे तेल आयात, ट्रंप के दावे पर सीधा खंडन नहीं
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा तेल आयात राष्ट्रीय हितों से तय होगा। ट्रंप के रूसी तेल दावे पर खंडन नहीं किया। संसद समिति को व्यापार समझौतों पर ब्रीफिंग होगी।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार (9 फरवरी 2026) को कहा कि देश का तेल आयात पूरी तरह “राष्ट्रीय हितों” के आधार पर तय किया जाएगा। हालांकि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का सीधा खंडन नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है।
मिस्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों के बारे में संसद की समिति को जानकारी देने की तैयारी कर रही है। साथ ही बांग्लादेश के साथ व्यापारिक संबंधों पर भी चर्चा की जाएगी।
विदेश मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी नोटिस के अनुसार, संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति को मंगलवार (10 फरवरी 2026) को ब्रीफ किया जाएगा। इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर कर रहे हैं। बैठक में भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौतों के प्रमुख पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी।
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विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत के तेल आयात का फैसला पर्याप्त उपलब्धता, उचित कीमत और आपूर्ति की विश्वसनीयता जैसे कारकों को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित भारत की प्राथमिकता हैं और इन्हीं के आधार पर आयात से जुड़े निर्णय लिए जाते हैं।
इस बीच विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है और व्यापार समझौतों के असर, खासकर किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष यह भी मांग कर रहा है कि सरकार ट्रंप के बयान पर स्पष्ट स्थिति बताए।
सरकार का कहना है कि संसद की समिति को सभी व्यापारिक समझौतों और उनसे जुड़े मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी, ताकि नीति से जुड़े सवालों का समाधान किया जा सके।
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