विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस छोड़ी, डोटासरा पर लगाए गंभीर आरोप
विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए डोटासरा पर पार्टी की कार्यशैली, भर्ती प्रक्रियाओं और टिकट वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। डोटासरा ने पार्टी में मतभेद खारिज किए।
राजस्थान के पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा की। यह घटनाक्रम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ उनके सार्वजनिक मतभेदों के बीच सामने आया है। हालिया शहरी निकाय चुनावों के बाद भरतपुर और डीग में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर विश्वेंद्र सिंह ने संगठन और टिकट वितरण पर सवाल उठाए थे।
अपने इस्तीफे में विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि वह पार्टी में कथित चापलूसी और गलत रीति-नीतियों के माहौल में खुद को असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी अंतरात्मा और अपने सिद्धांतों के आधार पर फैसले लिए हैं। सिंह ने कहा कि यदि सच को सच कहना और गलत का समर्थन नहीं करना अपराध है, तो वह ऐसा आगे भी करते रहेंगे।
विश्वेंद्र सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन को “खुली किताब” बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और जनता के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में घुटन के साथ बने रहने के बजाय स्वाभिमान के साथ अलग होना बेहतर है।
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इस्तीफे से पहले सिंह ने गोविंद सिंह डोटासरा पर कई गंभीर आरोप भी लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान आरएएस और रीट से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनियमितताएं हुईं। सिंह ने आरोप लगाया कि 2016 और 2018 की आरएएस भर्तियों में डोटासरा के परिवार से जुड़े कुछ लोगों को साक्षात्कार में समान अंक मिले। उन्होंने ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र से जुड़े मामले की भी जांच की मांग की। ये आरोप विश्वेंद्र सिंह के दावे हैं और स्वतंत्र जांच से इनकी पुष्टि होना बाकी है।
डोटासरा ने इससे पहले पार्टी में मतभेद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कांग्रेस राजस्थान में मजबूत हो रही है। उन्होंने विश्वेंद्र सिंह के आरोपों को प्रचार करार दिया।
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