विश्वनाथन आनंद बने फिडे के पहले भारतीय अंतरिम अध्यक्ष, रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान
पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद फिडे के पहले भारतीय अंतरिम अध्यक्ष बने हैं। यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद आर्कादी द्वोर्कोविच ने अस्थायी रूप से अपने अधिकार स्थगित किए हैं।
भारत के महान शतरंज खिलाड़ी और पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ फिडे (FIDE) के अंतरिम अध्यक्ष का पद संभालकर इतिहास रच दिया है। वह वैश्विक शतरंज संस्था के इस सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। यह नियुक्ति मौजूदा अध्यक्ष आर्कादी द्वोर्कोविच द्वारा यूरोपीय संघ और स्विट्जरलैंड के प्रतिबंधों के चलते अपने अधिकारों का प्रयोग स्वेच्छा से स्थगित करने के बाद हुई है।
फिडे के पूर्व उपाध्यक्ष ग्रैंडमास्टर बशार कौआतली ने इसे भारतीय शतरंज के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार कोई भारतीय फिडे का अंतरिम अध्यक्ष बना है।
कार्यभार संभालने के बाद विश्वनाथन आनंद ने कहा कि फिडे चार्टर के अनुसार उन्होंने अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारियां ग्रहण की हैं। उन्होंने आर्कादी द्वोर्कोविच के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संगठन के हित और स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आनंद ने कहा कि फिडे परिषद, प्रशासन और सदस्य देशों के सहयोग से उनका लक्ष्य संगठन के कार्यों में निरंतरता बनाए रखना और वैश्विक शतरंज परिवार की सेवा करना होगा।
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आर्कादी द्वोर्कोविच ने अपने बयान में कहा कि यूरोपीय संघ और स्विट्जरलैंड के प्रतिबंधों के कारण फिडे के कामकाज पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसलिए उन्होंने तत्काल प्रभाव से अपने अधिकारों का प्रयोग स्थगित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक उन पर लागू प्रतिबंध समाप्त नहीं हो जाते।
हालांकि द्वोर्कोविच ने प्रतिबंधों को अवैध और अनुचित बताते हुए उन्हें अदालत में चुनौती देने की घोषणा की है। फिडे परिषद ने भी उनके इस निर्णय को स्वीकार और अनुमोदित कर दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब द्वोर्कोविच फिडे अध्यक्ष के रूप में तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। फिडे का अगला अध्यक्षीय चुनाव सितंबर में उज्बेकिस्तान में आयोजित होने वाले 46वें शतरंज ओलंपियाड के दौरान महासभा में होगा।
विश्वनाथन आनंद पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह उपाध्यक्ष पद के लिए दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन फिडे के विकास और विशेष रूप से उभरते शतरंज महासंघों को मजबूत बनाने के लिए अपना अनुभव साझा करते रहेंगे।
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