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सुवेंदु अधिकारी के साथ पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल में शामिल हुए अग्निमित्रा पॉल, दिलीप घोष समेत 5 मंत्री

पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार के गठन के साथ अग्निमित्रा पॉल, दिलीप घोष सहित पांच नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन पर जोर दिया गया।

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। कोलकाता में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कई एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। इस दौरान भाजपा के पांच विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली।

बंगाल कैबिनेट में अग्निमित्रा पॉल, दिलीप घोष, निसिथ प्रमाणिक, क्षुदिराम टुडू और अशोक कीर्तनिया को शामिल किया गया है। भाजपा ने मंत्रिमंडल गठन में आदिवासी, अनुसूचित जाति और जमीनी स्तर के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई है।

दिलीप घोष

दिलीप घोष पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। बंगाल में भाजपा संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। वे मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं।

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अग्निमित्रा पॉल

अग्निमित्रा पॉल नई सरकार की एकमात्र महिला मंत्री बनी हैं। फैशन डिजाइनर से राजनेता बनीं अग्निमित्रा 2019 में भाजपा में शामिल हुई थीं। वे भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष और बाद में पार्टी की महासचिव भी रहीं। उन्होंने आसनसोल दक्षिण सीट से जीत हासिल की थी।

निसिथ प्रमाणिक

उत्तर बंगाल के युवा नेता निसिथ प्रमाणिक भाजपा के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। वे पहले तृणमूल कांग्रेस में थे, लेकिन 2019 में भाजपा में शामिल हो गए। नरेंद्र मोदी सरकार में वे गृह राज्य मंत्री और खेल राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। राजबंशी समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

अशोक कीर्तनिया

अशोक कीर्तनिया उत्तर 24 परगना जिले की बांगांव उत्तर सीट से विधायक हैं। वे लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और मतुआ समुदाय में प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।

क्षुदिराम टुडू

क्षुदिराम टुडू बांकुरा जिले के आदिवासी नेता हैं और जंगलमहल क्षेत्र की रानीबांध सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा आदिवासी समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उन्हें अहम चेहरा मानती है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा ने इस मंत्रिमंडल के जरिए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है।

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