पश्चिम बंगाल में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना लागू करने की घोषणा
पश्चिम बंगाल में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना लागू होगी। कन्यारत्न योजना में आर्थिक सहायता और उच्च शिक्षा अनुदान बढ़ाया जाएगा।
पश्चिम बंगाल में बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि राज्य में केंद्र की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना लागू की जाएगी। उन्होंने यह घोषणा कोलकाता में आयोजित कन्यारत्न दिवस कार्यक्रम के दौरान की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक लड़कियों की पढ़ाई को प्रोत्साहित करने के लिए कई नई पहल शुरू कर रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य छात्राओं को आर्थिक सहायता देकर उनकी शिक्षा जारी रखने में मदद करना है।
राज्य सरकार की कन्यारत्न योजना के तहत अगले वर्ष से बालिकाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में मिलने वाली 1,000 रुपये की सहायता राशि को बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस अतिरिक्त सहायता से परिवारों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलेगी और अधिक बालिकाएं अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगी।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाली छात्राओं के लिए भी सरकार ने बड़ी घोषणा की है। उन्हें दी जाने वाली एकमुश्त सहायता राशि 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी जाएगी। इससे छात्राओं को कॉलेज और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद मिलेगी।
सुवेंदु अधिकारी ने स्वामी विवेकानंद मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति योजना के संबंध में भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि उच्च माध्यमिक परीक्षा में 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को इस योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जाएगी।
सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य आर्थिक स्थिति की वजह से शिक्षा से वंचित होने वाले विद्यार्थियों को सहायता देना और मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।
कन्यारत्न दिवस पर की गई घोषणाओं को पश्चिम बंगाल में बालिका शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि छात्राओं को प्राथमिक स्तर से उच्च शिक्षा तक लगातार आगे बढ़ने के लिए जरूरी आर्थिक और संस्थागत सहयोग मिल सके।
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