ऐसे नहीं जी सकता, अवैध प्रवासियों के खिलाफ अभियान में पश्चिम बंगाल का युवक फिर हिरासत में
कर्नाटक में अवैध प्रवासियों के खिलाफ अभियान के दौरान पश्चिम बंगाल के रफीकुल बिस्वास को फिर हिरासत में लिया गया। हाईकोर्ट पहले उनका मतदाता पहचान पत्र असली बता चुका था।
कर्नाटक में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच पश्चिम बंगाल के रहने वाले 32 वर्षीय रफीकुल बिस्वास को दोबारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। यह कार्रवाई कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा उनके पक्ष में राहत दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुई।
रफीकुल बिस्वास बेंगलुरु में रहते हैं और उन्हें कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासी बताया गया था। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद उन्हें जारी किए गए मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) को कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में ‘वास्तविक’ माना था।
रफीकुल को पहले 4 अगस्त 2026 को हिरासत से जुड़े एक मामले में राहत मिली थी। इसके चार दिन बाद, 8 अगस्त को बेंगलुरु शहर पुलिस द्वारा अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन मुक्ता’ के दौरान उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया।
और पढ़ें: सीमा सुरक्षित हुए बिना भारत सुरक्षित नहीं हो सकता: बंगाल में अमित शाह
रफीकुल ने बताया कि उन्होंने पुलिस को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दिखाई थी। इस आदेश में उनके खिलाफ दर्ज मामला रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय होने का प्रमाण देने के लिए लगातार दबाव और तनाव झेलना बेहद मुश्किल हो गया है।
उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि जब भी कोई उनसे पूछता है कि वह कहां से हैं, तो उन्हें डर लगता है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल का नाम बताने और मुस्लिम होने की जानकारी सामने आने के बाद उन्हें तुरंत बांग्लादेश जाने के लिए कहा जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय होने का प्रमाण देने के लिए आखिर उन्हें और क्या करना होगा।
बाद में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस को हाईकोर्ट के हालिया आदेश की जानकारी दी और रफीकुल को उसी दिन रिहा कर दिया गया।
इस घटना ने अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए चलाए जा रहे अभियानों में नागरिकों के दस्तावेजों की जांच और उनके अधिकारों को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है।
और पढ़ें: कोलकाता की मिर्जा गालिब स्ट्रीट के होटल में भीषण आग, 9 लोगों की मौत